रागेच्छासुखदुःखादि बुद्धौ सत्यां प्रवर्तते। सुषुप्तौ नास्ति तन्नशे तस्मादुद्देस्तू नात्मनः॥
आसक्ति, कामना, सुख, दुःख इत्यादि का तभी तक अनुभव होता है जब तक बुद्धि कार्य कर रही होती है, सुषुप्ति अवस्था में बुद्धि के न रहने पर इनकी भी प्रतीति नहीं होती है। इसीलिए इनका सम्बन्ध बुद्धि से है, न कि आत्मा से।
—आत्मबोध, श्लोक २०
प्रश्नकर्ता: आचार्य जी, श्लोक में सुषुप्ति का उल्लेख आया है। मुझे रात में भूतों से डर लगता है। क्या भूत होते हैं या नहीं होते हैं? मैं गाँव से हूँ और मेरे गाँव में भूतों के बहुत सारे क़िस्से और कहानियाँ हैं। डर इतना गहरा बैठ गया है कि रात में अकेले में कुछ दिख जाता है तो जान ही निकल जाती है। कृपया प्रकाश डालें।
आचार्य प्रशांत: सुषुप्ति माने चेतना की गहरी नींद की अवस्था। जब तुम बहुत गहरी नींद में होते हो, इतनी गहरी नींद कि चेतना की सामान्य चंचलता एकदम ही थम जाए, उसको कहते हैं सुषुप्ति। जब जगे हुए हो तो देखा है मन में कितनी हलचल रहती है? सो जाओ तो हलचल कम हो जाती है लेकिन थोड़ी-बहुत तो रहती ही है। सोने पर भी कुछ-कुछ चल रहा होता है, सपने आ रहे होते हैं। फिर नींद जब और गहरा जाती है तो मन की हलचल और थम जाती है। उस अवस्था को कहते हैं सुषुप्ति।
आगे पूछा है, "क्या भूत होते हैं?"


