प्रश्नकर्ता: आचार्य जी, धोखे का डर रहता है। उसको कैसे दूर करें?
आचार्य प्रशांत: तो धोखे का थोड़े ही तुम्हें डर रहता है, तुम्हें तो डर ये रहता है कुछ खो ना जाए। धोखे से तुम्हें एक लाख रुपए मिल जाएँ तो डर लगेगा?
धोखे का थोड़े ही डर है। डर ये है कि धोखे से कहीं कुछ नुकसान न हो जाए। बहुत लोगों को धोखे से बहुत फायदा भी हो जाता है, सोच रहे थे कुछ और, हो कुछ और गया। देखो कितने फ़ायदे हुए हैं धोखे से।
तो क्यों है डर नुकसान का?
प्र: पैसे का, रिश्ते का। मुख्य परेशानी डर है।
आचार्य: फिर क्या होगा? जब चीज़ें खो जाएँगी तब क्या होगा? जिन चीज़ों के खोने का भय है वो खो जाएँगी तो क्या होगा?
प्र: दुःख।
आचार्य: ठीक है, दुःख होगा तो क्या होगा?

