वक्ता: तुम्हें किसने कह दिया कि बाहर से जो आ रहा है, इसके दो प्रकार होते हैं, अच्छा और बुरा?
श्रोता: ये ही सिखाया गया है, सर।
वक्ता: किसने, बाहर से?
श्रोता: बाहर से ही तो सीखेंगे।
वक्ता: तो वही तो कह रहा हूँ,
मूल अंतर बस दो हैं- ‘ बाहर और भीतर ।’
तुम्हें तो जो सही और गलत भी पता है, अच्छा और बुरा भी पता है, वो किसी बाहर वाले ने तुम्हारे मन में ठूस दिया है। ऐसा ही तो हुआ है न? बता दिया गया, सदा सच बोलो, हिंसा मत करो, झूठ न बोलो, चुरा के मत खाओ और वो तुम दिन रात करते हो।
(सब हँसते हैं)


