वक्ता: आप जो कुछ भी पाना चाहते हो, वो पहले ही मौजूद है। अगर पहले से ही मौजूद ना हो तो वो इंस्टिंक्ट ही नहीं उठेगी पाने की।
श्रोता: हम ये कह सकते हैं कि जो लक्ष्य है मूलतया वो गन्दगी को साफ़ करने का है ताकि जो हम हैं, उस चीज़ को उजागर कर सकें। आमतौर पर जो भी है, हमें अपने बारे में गलत ही पता है। हम अपनेआप को जानते नहीं है, फिर भी हर व्यक्ति जिस दिशा में बढ़ने का प्रयास करता है, कहीं ना कहीं उसको ये लगता है कि वो ये कर सकता है।
वक्ता: उसको बिलकुल लगता है ये कर सकता है और ये बड़े गहरे विश्वास की बात है कि, ‘’मैं जो पा रहा हूँ, वो मौजूद ही है।’’ ये एक जबरदस्त किस्म का विश्वास देगी बात। इसको समझ रहे हो?
श्रोता१: मुझे अपन लक्ष्य प्राप्त हो चुका है, बस मैंने उसका अभी उत्सव नहीं मनाया।
श्रोता२: मुझे पता हो गया इसका मतलब ये भी तो कह सकते हैं कि आई आलरेडी अचीव्ड द गोल लेकिन मुझे पता नहीं है, मैंने क्या अचीव कर लिया है।
वक्ता: आपको पता नहीं है और उस पता ना होने के कारण आपने दस तरह के झंझट पाल रखे हैं। समझ रहे हो? आप बाहर जो भी करोगे, वो कोई अचीवमेंट इसलिए नहीं होगा क्यूंकि वो तो पहले से ही उपलब्ध है। आप बाहर जो भी अचीव करना चाहते हो, वो प्रिअचीव्ड

