परिणाम शब्द का क्या अर्थ है? || आचार्य प्रशांत, युवाओं के संग (2013)

आचार्य प्रशांत: सवाल आया है रोहित से, कि ‘परिणाम’ शब्द से क्या अर्थ है?
अब ऐसा तो है नहीं कि ‘परिणाम’ शब्द हम पहली बार सुन रहे हैं। ‘परिणाम’ शब्द से हमारा वास्ता रोज़ ही पड़ता रहता है। रोज़ाना ही ये हमारे सामने आता रहता है। तो ‘परिणाम’ शब्द के पहले उन अर्थों को ध्यान से देखना आवश्यक है, जो हमारे मन में पहले से ही बैठे हुए हैं। जो हमारे मन में पहले से ही बैठ गए हैं।
क्योंकि जब तक हम उसको नहीं समझते, जो मन में पहले से ही बैठा हुआ है, उसको ध्यान से देख नहीं लेते; किसी नए के आ जाने की कोई सम्भावना है नहीं! जो ये सवाल तुम पूछ रहे हो, कि परिणाम से क्या अर्थ है, तो निश्चित रूप से, तुम ये नहीं चाहते कि मैं वही सब दोहराऊँ जो तुम्हें पहले से ही पता है। क्योंकि उसमें तुम्हारा कोई लाभ नहीं है। ठीक? ‘परिणाम’ के वो मायने जो तुम्हें पहले से ही पता हैं, जो तुम्हारे मन में पहले ही भरे हुए हैं, अगर मैं उन्हीं को दोबारा निरूपित करूँ, तो तुम्हें कुछ मिलेगा नहीं। तुम चाहते हो कुछ नया मिले, कुछ असली मिले, कुछ वास्तविक मिले। ठीक? तो पहले उसको देखते हैं, और फिर उसके आगे बढ़ पाएँगे।
तुमने ‘परिणाम’ का सदा अर्थ ये जाना है कि अभी कुछ करूँगा, और इसका कुछ परिणाम निकलेगा ‘भविष्य’ में! तुम्हारे लिए ‘परिणाम’ का अर्थ हमेशा भविष्य में है। तुम कहते हो कि असली चीज़ वो है जो भविष्य में घटेगी। जो सबसे महत्वपूर्ण है, वो भविष्य में कहीं होगा! इसका सीधा-सीधा अर्थ ये है, कि तुम कहते हो, कि अभी जो हो रहा है, उसका मूल्य नहीं है। असली मूल्य है उसका, जो आगे होगा। जो परिणाम है।
उदाहरण ले लो – "पढ़ाई का कोई महत्व नहीं है, वो एक दिन ख़ास होगा, जिस दिन मेरा परिणाम घोषित होगा। बी.टेक. का कोई विशेष महत्व नहीं है, वो एक दिन ख़ास होगा जिस दिन मुझे अपनी डिग्री मिलेगी या नौकरी मिलेगी।" परिणाम ये है कि आज तुम्हें पता चल जाए, कि डिग्री नहीं मिल रही है, या नौकरी मिलने की कोई सम्भावना नहीं है, तो पढ़ाई बेकार हो जाएगी। तुम शायद चाहोगे ही नहीं कि कॉलेज आऊँ और आगे की पढ़ाई करूँ। क्योंकि जीवन एक ‘परिणाम’ पर टिका हुआ है। और वो परिणाम अभी नहीं है, सदा भविष्य में बैठा हुआ है। परिणाम सदा भविष्य में है, मैं तुमसे पूछना चाहता हूँ, जीवन कहाँ पर है? तुम कब जी रहे हो? अभी? या भविष्य में?

