प्रश्न: सर, परिपक्वता क्या है?
वक्ता: (१८-२२ वर्ष की आयु के विद्यार्थियों की सभा को संबोधित करते हुए)
यह शब्द ‘परिपक्वता’ हम सभी को अपने लिए महत्वपूर्ण लगता है, क्योंकि शारीरिक रूप से हम सभी परिपक्व हो गए हैं । अपने शरीरों को देखें तो दिखाई देगा कि हम सभी व्यस्क स्त्री या पुरुष बन चुके हैं। पर परिपक्वता वास्तव में क्या होती है? क्या परिपक्वता मात्र शारीरिक होती है?
श्रोता १: परिपक्वता का अर्थ है, समझ।
वक्ता: शारीरिक परिपक्वता का अर्थ है- अपने पाँव पर स्वयं चल पाने की क्षमता। और मानसिक परिपक्वता का अर्थ है- ऐसा मन जो अपनी समझ से दुनिया को देखे।
आप शारीरिक रूप से अपरिपक्व कहे जाओगे, अगर आपको खड़े होने के लिए किसी का सहारा लेना पड़े। और आप मानसिक रूप से अपरिपक्व कहे जाओगे, अगर आपकी ज़िंदगी लगातार किसी दूसरे पर निर्भर है। तो परिपक्वता का सीधा-सीधा अर्थ है- “मैं निर्भर नहीं हूँ। मैं गुलाम नहीं हूँ”। परिपक्वता का और कोई अर्थ नहीं है।
परिपक्वता का अर्थ इतना ही है- “मैं समझदार हूँ। मैं किसी का भी आँख बंद कर अनुसरण नहीं करता हूँ। हाँ अपने जीवन के शुरू के सोलह-सत्रह वर्ष औरों का अनुसरण किया। अपनी आँखें बंद कर उनका कहा माना, अनके कहे अनुसार संस्कारित हुआ । पर अब मैं उस स्थिति में हूँ जहाँ मैं अपने संस्कारित मन को देख सकता हूँ और उससे मुक्ति पा सकता हूँ”। यही परिपक्वता है। “मेरे पास एक स्वस्थ मन है”- यही परिपक्वता है।



