सत्किम्? कालत्रयेअपि तिष्ठतीतिसत्। चित्किम्? ज्ञानस्वरूपः। आनंद कः? सुखस्वरूपः।
सत् किसे कहते हैं? जो तीनों कालों में रहता है। चित् क्या है? जो ज्ञानस्वरूप है। आनंद क्या है? जो सुखस्वरूप है।
—तत्वबोध, श्लोक १६.२-१६.४
प्रश्नकर्ता: आचार्य जी, सत्, चित् और आनंद के बारे में आदि शंकराचार्य बता रहे हैं। कृपया इसे और सरल करें।
आचार्य प्रशांत: सत्, चित्, आनंद, ये सत्य के गुण अथवा उपाधियाँ नहीं हैं। ये वो हैं जिनकी मन को सदा तलाश रहती है और मुक्ति की दशा में या मुक्ति के अति निकट आने पर जिनका अनुभव होना मन को आरंभ हो जाता है।
सत् क्या है?
वह जो तीनों कालोंं में विद्यमान है।


