
विषयों से आसक्ति माने—मोह। जीवन में हम हर चीज़ को स्वयं से जोड़ लेते हैं। बचपन खिलौनों के मोह में निकलता है, जवानी कामवासना में निकलती है और बुढ़ापा मकान और संपत्ति जोड़ने में निकल जाता है। इन सब के बीच एक सवाल पूछना जरूरी है— क्या इन सब में शांति का पैगाम है? क्या हमारी इच्छाएंँ सच में हमें मुक्ति दे देंगी? क्या भोग भोग के हम मुक्त हो जाएंँगे? कौन है जो हमारे मन के केंद्र में है— वासना या राम? कुछ ऐसे ही प्रश्नों के उत्तर से हम जानेंगे जीवन को, आचार्य प्रशांत संग इस सरल से कोर्स में।
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