संस्था से संपर्क हेतु इस फॉर्म को भरें: http://acharyaprashant.org/enquiry?formid=201 या कॉल करें: +91- 9650585100/9643750710 आप अपने प्रश्न इस नम्बर पर व्हाट्सएप्प कर सकते हैं: +91-7428348555 ~~~~~~~~~~~~~ आचार्य प्रशांत संग ऑनलाइन पाठ्यक्रमों में भाग लेने के लिए: https://solutions.acharyaprashant.org ~~~~~~~~~~~~~ आचार्य प्रशांत से मुलाकात हेतु, और उनकी जीवनी, कृतित्व, पुस्तकों, व मीडिया के लिए: https://acharyaprashant.org ~~~~~~~~~~~~~ इस अभियान को, और लोगों तक पहुँचाने में आर्थिक सहयोग दें: http://acharyaprashant.org/donate ~~~~~~~~~~~~~ वीडियो जानकारी: शब्दयोग सत्संग, 10.4.17, ऋषिकेश, भारत प्रसंग: ~ तुम सदैव मुक्त हो, सब तुम्हारी इच्छा है ऐसा क्यों बता रहें है अष्टावक्र? ~ आत्मा क्या है? ~ आत्मस्थ कैसे हुआ जा सकता है? ~ क्या आत्मा को पाने के लिए अभ्यास की जरूरत है? संगीत: मिलिंद दाते ~~~~~~~~~~~~~ अष्टावक्र गीता, अध्याय १८ से समस्तं कल्पनामात्रमात्मा मुक्तः सनातनः । इति विज्ञाय धीरो हि किमभ्यस्यति बालवत् ॥७॥ सबकुछ कल्पना मात्र है, और आत्मा नित्य मुक्त है, धीर पुरुष इस बात को जानकर, फिर बालक के समान क्या अभ्यास करे!