संस्था से संपर्क हेतु इस फॉर्म को भरें: http://acharyaprashant.org/enquiry?formid=201 या कॉल करें: +91- 9650585100/9643750710 आप अपने प्रश्न इस नम्बर पर व्हाट्सएप्प कर सकते हैं: +91-7428348555 ~~~~~~~~~~~~~ आचार्य प्रशांत संग ऑनलाइन पाठ्यक्रमों में भाग लेने के लिए: https://solutions.acharyaprashant.org ~~~~~~~~~~~~~ आचार्य प्रशांत से मुलाकात हेतु, और उनकी जीवनी, कृतित्व, पुस्तकों, व मीडिया के लिए: https://acharyaprashant.org ~~~~~~~~~~~~~ इस अभियान को, और लोगों तक पहुँचाने में आर्थिक सहयोग दें: http://acharyaprashant.org/donate ~~~~~~~~~~~~~ वीडियो जानकारी: शब्दयोग सत्संग, 16.1.13, अद्वैत बोधस्थल, ग्रेटर नॉएडा, उत्तर प्रदेश, भारत प्रसंग: ~अद्वैत का क्या अर्थ है? ~क्या द्वैत को समझना ही अद्वैत है? ~द्वैतवादी और अद्वैतवादी में क्या समानता है? ~द्वैत से बाहर कैसे आये? ~मन द्वैत में क्यों जीता है? ~मन को एकात्मक कैसे करें? ~क्या मन पर पूरी तरह नियंत्रण रखा जा सकता है? ~द्वैत का होना क्यों आवश्यक है? ~अद्वैत से द्वैत क्यों पैदा हो जाता है? ~क्या अद्वैत में जिया जा सकता है? संगीत: मिलिंद दाते ~~~~~~~~~~~~~ एक हि खाक घड़े सब भाड़े, एक ही सिरजनहारा। ~ गुरु कबीर जैसे बाढ़ी काष्ठ ही काटे, अगनि न काटै कोई। ~ गुरु कबीर सब घटि अंतर तू ही व्यापक, धरै सरूपे सोई। ~ गुरु कबीर निर्भय भया कछु नहीं व्यापै, कहै कबीर दीवाना। ~ गुरु कबीर