संस्था से संपर्क हेतु इस फॉर्म को भरें: http://acharyaprashant.org/enquiry?formid=201 या कॉल करें: +91- 9650585100/9643750710 आप अपने प्रश्न इस नम्बर पर व्हाट्सएप्प कर सकते हैं: +91-7428348555 ~~~~~~~~~~~~~ आचार्य प्रशांत संग ऑनलाइन पाठ्यक्रमों में भाग लेने के लिए: https://solutions.acharyaprashant.org ~~~~~~~~~~~~~ आचार्य प्रशांत से मुलाकात हेतु, और उनकी जीवनी, कृतित्व, पुस्तकों, व मीडिया के लिए: https://acharyaprashant.org ~~~~~~~~~~~~~ इस अभियान को, और लोगों तक पहुँचाने में आर्थिक सहयोग दें: http://acharyaprashant.org/donate ~~~~~~~~~~~~~ वीडियो जानकारी: संवाद सत्र, 12.10.14, गाज़ियाबाद, भारत प्रसंग: ~ "साधो ये मुरदों का गाँव" गुरु कबीर ऐसा क्यों बोल रहें है? ~ मरि हैं सहज अठ्ठासी, तैंतीस कोटि देवता मरि हैं ऐसा क्यों बोला जा रहा है? ~ जीवन माने क्या? संगीत: मिलिंद दाते ~~~~~~~~~~~~~ साधो ये मुरदों का गांव! पीर मरे, पैगम्बर मरि हैं, मरि हैं ज़िन्दा जोगी, राजा मरि हैं, परजा मरि हैं, मरि हैं बैद और रोगी। साधो ये मुरदों का गांव! चंदा मरि है, सूरज मरि है, मरि हैं धरणी आकासा, चौदह भुवन के चौधरी मरि हैं इन्हूँ की का आसा। साधो ये मुरदों का गांव! नौहूँ मरि हैं, दसहुँ मरि हैं, मरि हैं सहज अठ्ठासी, तैंतीस कोटि देवता मरि हैं, बड़ी काल की बाज़ी। साधो ये मुरदों का गांव! नाम अनाम अनंत रहत है, दूजा तत्व न होइ, कहे कबीर सुनो भाई साधो भटक मरो मत कोई। ~ संत कबीर