संस्था से संपर्क हेतु इस फॉर्म को भरें: http://acharyaprashant.org/enquiry?formid=201 या कॉल करें: +91-9650585100/+91-9643750710 ~~~~~~~~~~ आचार्य प्रशांत की बात को सब तक पहुँचाने में आर्थिक सहयोग दें: http://acharyaprashant.org/donate ~~~~~~~~~~ आचार्य प्रशांत से वेदांत, उपनिषद, गीता एवं अन्य ग्रन्थों की शिक्षा हेतु: https://acharyaprashant.org/online-courses या कॉल करें: +91-9650585100 ~~~~~~~~~~ आचार्य प्रशांत से मुलाकात के लिए: https://acharyaprashant.org/camps या कॉल करें: +91-9650585100 ~~~~~~~~~~ आचार्य प्रशांत के जीवन सम्बन्धी ऑनलाइन कोर्सेस के लिए: https://solutions.acharyaprashant.org ~~~~~~~~~~ आचार्य प्रशांत की पुस्तकों के लिए: http://books.acharyaprashant.org ~~~~~~~~~~ वीडियो जानकारी: 27.12.2020, आमने-सामने शिविर, ऋषिकेश, उत्तराखंड, भारत प्रसंग: माया महा ठगनी हम जानी।। तिरगुन फांस लिए कर डोले बोले मधुरे बानी।। केसव के कमला वे बैठी शिव के भवन भवानी।। पंडा के मूरत वे बैठीं तीरथ में भई पानी।। योगी के योगन वे बैठी राजा के घर रानी।। काहू के हीरा वे बैठी काहू के कौड़ी कानी।। भगतन की भगतिन वे बैठी बृह्मा के बृह्माणी।। कहे कबीर सुनो भई साधो यह सब अकथ कहानी।। ~कबीर साहब ~ 'प्रकाश स्वरुप परमात्मा सृष्टिकाल में इस जगत में एक-एक जाल को अनेक प्रकार से विभक्त कर स्थापित करता है और प्रलय काल में सबका संहार कर देता है।' इसका क्या अर्थ है? ~ अहंकार क्या है? ~ माया क्या है? और वो कैसे ठगती है? संगीत: मिलिंद दाते ~~~~~~~~~~