संस्था से संपर्क हेतु इस फॉर्म को भरें: http://acharyaprashant.org/enquiry?formid=201 या कॉल करें: +91- 9650585100/9643750710 आप अपने प्रश्न इस नम्बर पर व्हाट्सएप्प कर सकते हैं: +91-7428348555 ~~~~~~~~~~~~~ आचार्य प्रशांत संग ऑनलाइन पाठ्यक्रमों में भाग लेने के लिए: https://solutions.acharyaprashant.org ~~~~~~~~~~~~~ आचार्य प्रशांत से मुलाकात हेतु, और उनकी जीवनी, कृतित्व, पुस्तकों, व मीडिया के लिए: https://acharyaprashant.org ~~~~~~~~~~~~~ इस अभियान को, और लोगों तक पहुँचाने में आर्थिक सहयोग दें: http://acharyaprashant.org/donate ~~~~~~~~~~~~~ वीडियो जानकारी: शब्दयोग सत्संग, 20.7.19, अद्वैत बोधस्थल ,ग्रेटर नॉएडा, भारत प्रसंग: श्रीमद्भगवद्गीता (अध्याय 2, श्लोक 19) य एनं वेत्ति हन्तारं यश्र्चैनं मन्यते हतम् | उभौ तौ न विजानीतो नायं हन्ति न हन्यते || भावार्थः जो इस आत्मा को मारने वाला समझता है तथा जो इसको मरा मानता है, वे दोनों ही नहीं जानते ; क्योंकि यह आत्मा वास्तव में न तो किसी को मारता है और न किसी के द्वारा मारा जाता है ।। ------------ श्रीमद्भगवद्गीता (अध्याय 2, श्लोक 20) न जायते म्रियते वा कदाचि-न्नायं भूत्वा भविता वा न भूयः। अजो नित्यः शाश्वतोऽयं पुराणोन हन्यते हन्यमाने शरीरे॥२०॥ भावार्थः यह आत्मा किसी काल में भी न तो जन्मता है और न मरता ही है तथा न यह उत्पन्न होकर फिर न होने वाला ही है क्योंकि यह अजन्मा, नित्य, सनातन और पुरातन है, शरीर के मारे जाने पर भी यह मारा नहीं जाता॥ ----------- श्रीमद्भगवद्गीता (अध्याय 2, श्लोक 23) नैनं छिन्दन्ति शस्त्राणि नैनं दहति पावकः। न चैनं क्लेदयन्त्यापो न शोषयति मारुतः॥ भावार्थ: इस आत्मा को शस्त्र नहीं काट सकते, आग इसको जला नहीं सकती, जल इसको गला नहीं सकता और वायु इसको सुखा नहीं सकती॥ ___ आत्मा क्या है? जीवात्मा क्या है? आत्मा का पुनर्जन्म होता है? संगीत: मिलिंद दाते ~~~~~~~~~~~~~