🧔🏻♂आचार्य प्रशांत गीता पढ़ा रहे हैं। घर बैठे लाइव सत्रों से जुड़ें, अभी फॉर्म भरें — https://acharyaprashant.org/hi/enquiry-gita?cmId=m00021 📚 आचार्य प्रशांत की पुस्तकें पढ़ना चाहते हैं? फ्री डिलीवरी पाएँ: https://acharyaprashant.org/hi/books?cmId=m00021 📲 आचार्य प्रशांत की मोबाइल ऐप डाउनलोड करें: Android: https://play.google.com/store/apps/details?id=org.acharyaprashant.apbooks iOS: https://apps.apple.com/in/app/acharya-prashant/id1603611866 📝 चुनिंदा बोध लेख पढ़ें, खास आपके लिए: https://acharyaprashant.org/en/articles?l=1&cmId=m00021 ~~~~~~~~~~~~~ वीडियो जानकारी: विश्रांति शिविर, 7.3.20, अहमदाबाद, गुजरात, भारत 📋 Video Chapters 0:00 – भूमिका (Intro) 0:07 – जीवन्मुक्त गीता: क्षेत्र, क्षेत्रज्ञ और आत्मा का भेद 10:07 – आत्मा कभी तड़पती नहीं 21:25 – पीड़ा: पैगाम परम का 28:48 – मुफ़्त का ज्ञान: सही और व्यर्थ ज्ञान में अंतर 31:00 – अहंकार बनाम आत्मा: कौन करता है? कौन भोगता है? 37:28 – नकली को छोड़ो, असली स्वयं प्रकट होगा 44:25 – एक साथ दो नहीं: अंतिम चुनाव 45:39 – समापन प्रसंग: तत्त्व क्षेत्रं व्योमातीतमहं क्षेत्रज्ञ उच्यते । अहं कर्ता च भोक्ता च जीवन्मुक्तः स उच्यते ॥ भावार्थ: पृथ्वी, जल, अग्नि, वायु और आकाश – इन पंचतत्वों से बना यह शरीर ही क्षेत्र है तथा आकाश से परे अहंकार ही क्षेत्रज्ञ है। यह मैं ही समस्त कर्मों का कर्ता और कर्मफलों का भोक्ता है । इस ज्ञान को धारण करने वाला ही वस्तुतः जीवन्मुक्त कहा जाता है। ~जीवन्मुक्त गीता (श्लोक ६) ~ जीवनमुक्त कौन है? ~ जीवनमुक्त कब होते हैं? ~ जीवनमुक्त होकर कैसे जिएं? ~ मुक्ति कौन चाहता है? ~ दुनिया में दुःख ज्यादा और सुख कम क्यों है? ~ क्या इसी शरीर के साथ मुक्त होकर जिया जा सकता है? ~ ऐसा कौन सा कर्म है जो परमानंद में लीन कर दे? ~ कोई भी घटना घटती है तो उसका भोक्ता कौन है? संगीत: मिलिंद दाते ~~~~~~~~~~~~~