संस्था से संपर्क हेतु इस फॉर्म को भरें: http://acharyaprashant.org/enquiry?formid=201 या कॉल करें: +91- 9650585100/9643750710 आप अपने प्रश्न इस नम्बर पर व्हाट्सएप्प कर सकते हैं: +91-7428348555 ~~~~~~~~~~~~~ आचार्य प्रशांत संग ऑनलाइन पाठ्यक्रमों में भाग लेने के लिए: https://solutions.acharyaprashant.org ~~~~~~~~~~~~~ आचार्य प्रशांत से मुलाकात हेतु, और उनकी जीवनी, कृतित्व, पुस्तकों, व मीडिया के लिए: https://acharyaprashant.org ~~~~~~~~~~~~~ इस अभियान को, और लोगों तक पहुँचाने में आर्थिक सहयोग दें: http://acharyaprashant.org/donate ~~~~~~~~~~~~~ वीडियो जानकारी: 05.10.2014, कौसानी, उत्तराखंड, भारत प्रसंग: रोज़ अज़ल दा मैनूं लगड़ा इश्क़ अवलड़ा अव्वल दा, रोज़ अज़ल दा। विच कड़ाही तिल-तिल पावे, तलिआं नूं चा तलदा। मोइआं नूं एह वल-वल मारे, दलियां नूं एह दलदा। की जाणां कोई चिणग कखी ए, नित सूल कलेजे सलदा। बुल्ल्हा, शौह दा न्योंह अनोखा, ओह नहीं रलाइआं रलदा। ~ संत बुल्लेशाह ~ संत बुल्लेशाह की काफियों का अर्थ कैसे समझें? ~ संत बुल्लेशाह कौन थे? ~ गुरु भक्ति क्या है? ~ सच्चा शिष्य कौन है? संगीत: मिलिंद दाते ~~~~~~~~~~~~~