संस्था से संपर्क हेतु इस फॉर्म को भरें: http://acharyaprashant.org/enquiry?formid=201 या कॉल करें: +91- 9650585100/9643750710 आप अपने प्रश्न इस नम्बर पर व्हाट्सएप्प कर सकते हैं: +91-7428348555 ~~~~~~~~~~~~~ आचार्य प्रशांत संग ऑनलाइन पाठ्यक्रमों में भाग लेने के लिए: https://solutions.acharyaprashant.org ~~~~~~~~~~~~~ आचार्य प्रशांत से मुलाकात हेतु, और उनकी जीवनी, कृतित्व, पुस्तकों, व मीडिया के लिए: https://acharyaprashant.org ~~~~~~~~~~~~~ इस अभियान को, और लोगों तक पहुँचाने में आर्थिक सहयोग दें: http://acharyaprashant.org/donate ~~~~~~~~~~~~~ वीडियो जानकारी: शब्दयोग सत्संग, 27.11.2013, अद्वैत बोधस्थल, नॉएडा , भारत प्रसंग: “Perhaps everything that frightens us in its deepest essence is something helpless, that needs our love.” ~ Rainer Maria Rilke आचार्य जी: प्रेम का अभाव ही डर है। जितना प्रेम बढ़ेगा, डर उतना न्यून होता जाएगा। डर अपने आप में शुभ भी है इस कारण कि डर सूचना देता है प्रेम के खाली होने की। वो धूमिल कि बड़ी प्यारी पंक्तियाँ हैं, कि, “क्या है जिसने तुम्हें बर्बरों के सामने अदब से रहना सिखाया है?” कोई गहरा डर ही होगा। उसका उत्तर भी वो आगे देते हैं। कहते हैं कि, “ऐसा नहीं है कि मैं ठंडा आदमी हूँ, मेरे भीतर भी आग है। पर उस आग के चारों तरफ हक्कर कटता एक पूंजीवादी दिमाग है।” ~ आचार्य प्रशांत जी संगीत: मिलिंद दाते ~~~~~~~~~~~~~ संस्था से संपर्क हेतु इस फॉर्म को भरें: http://acharyaprashant.org/enquiry?fo... या कॉल करें: +91- 9650585100/9643750710