🧔🏻♂आचार्य प्रशांत गीता पढ़ा रहे हैं। घर बैठे लाइव सत्रों से जुड़ें, अभी फॉर्म भरें — https://acharyaprashant.org/hi/enquiry-gita?cmId=m00021 📚 आचार्य प्रशांत की पुस्तकें पढ़ना चाहते हैं? फ्री डिलीवरी पाएँ: https://acharyaprashant.org/hi/books?cmId=m00021 📲 आचार्य प्रशांत की मोबाइल ऐप डाउनलोड करें: Android: https://play.google.com/store/apps/details?id=org.acharyaprashant.apbooks iOS: https://apps.apple.com/in/app/acharya-prashant/id1603611866 📝 चुनिंदा बोध लेख पढ़ें, खास आपके लिए: https://acharyaprashant.org/en/articles?l=1&cmId=m00021 ➖➖➖➖➖➖ #acharyaprashant #UpanishadGyaan #SpiritualTruths वीडियो जानकारी: शब्दयोग सत्संग, 26.6.17, औरा रिजॉर्ट, रामनगर, उत्तराखंड, भारत Title : उससे बाहर मत आना || आचार्य प्रशांत, अध्यात्म उपनिषद् पर (2017) 📋 Video Chapters 0:00 - Intro 0:53 - उपनिषद का प्रतीक: पानी का पौधा 2:07 - सत्य से जुड़े रहने की शक्ति 4:33 - गीता के 17वें-18वें अध्याय की गहराई 8:23 - भक्ति और संसार का रहस्य 10:56 - अहिंसा और सर्वव्यापी ईश्वर 12:51 - भीतर का दुख, बाहर का संघर्ष 15:14 - मन की सुरक्षा और नींद का खेल 18:20 - बचपन से वयस्कता तक का सफर 23:38 - आनंद की सच्ची प्राप्ति 25:51 – समापन (Outro) प्रसंग: ~ सत्य क्या है? ~ हम परमात्मा से क्यों बिछड़ जाते है? ~ सत्यस्थ होकर कैसे जीए? ~ सत्य के सानिध्य में निरंतर कैसे बने रहें? संगीत: मिलिंद दाते ~~~~~~~~~~~~~ यथापकृष्टं शैवालं क्षणमात्रं न तिष्ठति । आवृणोति तथा माया प्राज्ञं वापि पराङ्मुखम् ॥ १५॥ अज्ञानहृदयग्रन्थेर्निःशेषविलयस्तदा । समाधिना विकल्पेन यदाद्वैतात्मदर्शनम् ॥ १७॥॥ अत्रात्मत्वं दृढीकुर्वन्नहमादिषु संत्यजन् । उदासीनतया तेषु तिष्ठेद्घटपटादिवत् ॥ १८॥ ~ अध्यात्मोपनिषत