सर, क्या आप शादी के खिलाफ़ हैं? || आचार्य प्रशांत, गीता दीपोत्सव (2024)
आचार्य प्रशांत
अमीरों को देखता हूँ तो ख़ुद से नफ़रत होती है! || आचार्य प्रशांत (2024)
एक सागर की मौज, एक मेरी मौज || आचार्य प्रशांत, संत कबीर पर (2024)
दलित का ठप्पा माथे पर लगा है; मैं ये धर्म ही छोड़ दूँगा || आचार्य प्रशांत (2024)
दूसरों के शरीर को ऐसे नहीं छुआ जाता, दूसरों की ज़िंदगी में ऐसे नहीं घुसा जाता|| आचार्य प्रशांत(2024)
हम सब इतने नाराज़ क्यों हैं? Road Rage की वजह क्या? || आचार्य प्रशांत (2024)
सास-बहू के झगड़े का असली कारण || आचार्य प्रशांत (2024)
उनके लिए, जो भावनाओं में बह जाते हों || आचार्य प्रशांत, गीता दीपोत्सव (2024)
कृष्ण बार-बार क्यों आते हैं? || आचार्य प्रशांत
आत्मा न शरीर छोड़ती है, न शरीर में प्रवेश करती है || आचार्य प्रशांत, अष्टावक्र गीता पर (2024)
कैरियर का चुनाव कैसे करूँ? || आचार्य प्रशांत (2024)
तुम सुधर जाओ, फिर मैं आराम कर लूँगा || आचार्य प्रशांत (2024)
मेरी रेपुटेशन खराब कर दी, मेरी इज़्ज़त नहीं करते || आचार्य प्रशांत (2024)
इन्हें सन्यासी कहते हैं? || आचार्य प्रशांत, संत कबीर पर (2024)
वो मुझे छोड़ गई क्योंकि मेरी जाति दूसरी थी || आचार्य प्रशांत (2024)
सच के आगे नहीं झुकेंगे! नहीं झुकेंगे! || आचार्य प्रशांत, भगवद् गीता पर (2023)
क्यों नहीं मिलता दुखों से छुटकारा? समस्या को गहराई से समझें ||आचार्य प्रशांत,शून्यता सप्तति पर(2023)
Gen Z की मानसिक बेचैनी और समाधान || आचार्य प्रशांत (2024)
श्रद्धा क्या है? || आचार्य प्रशांत, भगवद् गीता पर (2023)
(गीता-46) आत्मज्ञान के प्रकाश में, अंधे कर्म सब त्याग दो... || आचार्य प्रशांत, भगवद् गीता पर (2023)
"सर, लड़कियाँ आक्रामक लड़के ही क्यों चुनती हैं?" || आचार्य प्रशांत (2024)
बुद्ध से नागार्जुन तक: वेदांत और शून्यवाद की अद्भुत यात्रा ||आचार्य प्रशांत, शून्यता सप्तति पर(2023)
अंधविश्वास, बाबागिरी और पैसा || आचार्य प्रशांत (2024)
क्यों करी बेईमानी? सीधी बात थी - तुम्हारी मर्जी थी! || आचार्य प्रशांत, कठ उपनिषद् पर (2023)
भगवान को बच्चा बना दो, और धर्म को खिलौना || आचार्य प्रशांत (2024)
ऐसे नहीं प्रसन्न होंगी देवी || आचार्य प्रशांत (2024)
गुरु का प्रेम, विवशता और पीड़ा || आचार्य प्रशांत, कठ उपनिषद् पर (2023)
कठ उपनिषद् श्रृंखला के आरंभ पर || आचार्य प्रशांत, कठ उपनिषद् पर (2023)
ज़िंदगी जब गिराए, तो हँसके बोल: और ज़ोर से! || आचार्य प्रशांत (2024)
लिविंग इन द मोमेन्ट (Living in the moment) - एक खतरनाक झूठ || आचार्य प्रशांत (2024)