उसके साथ खिलवाड़ मत करना || आचार्य प्रशांत, कृष्णमूर्ति पर (2017)
आचार्य प्रशांत
समस्याओं का समाधान उनके कारणों में नहीं मिलेगा || आचार्य प्रशांत, कृष्णमूर्ति पर (2017)
कल्पनाएँ ही आलस्य हैं || आचार्य प्रशांत, युवाओ के संग (2012)
न इच्छाएँ तुम्हारी, न उनसे मिलने वाली संतुष्टि तुम्हारी || आचार्य प्रशांत, युवाओ के संग (2012)
जो समय में है वो समय बर्बाद कर रहा है || आचार्य प्रशांत, युवाओ के संग (2012)
अपनी निजता क्यों खो देते हो? || आचार्य प्रशांत, युवाओ के संग (2012)
जब मन 'सिक' हो जाता है तो उसे कहते हैं मानसिकता || आचार्य प्रशांत, युवओं के संग (2012)
माहौल में कृष्ण बैठे हैं या शकुनि? || आचार्य प्रशांत, युवाओ के संग (2012)
अंग्रेज़ी की गुलामी छोड़ो || आचार्य प्रशांत, युवाओं के संग (2012)
बचपन से ही पीते हो प्रभावों की घुट्टी || आचार्य प्रशांत, युवाओ के संग (2012)
झूठा स्वाभिमान || आचार्य प्रशांत, युवाओ के संग (2012)
पुनर्जन्म, ग्रन्थपाठन और तुरीय अवस्था || आचार्य प्रशांत (2017)
जब हाथ फैलाओगे तो स्वतंत्र कैसे रह पाओगे? || आचार्य प्रशांत, युवाओ के संग (2012)
कर्म और कर्म का फल अलग-अलग हैं क्या? || आचार्य प्रशांत, संत कबीर पर (2016)
हमारी उम्मीदों का आधार क्या होता है? || आचार्य प्रशांत, युवओं के संग (2012)
ध्यान (अटेंशन) क्या है? || आचार्य प्रशांत (2017)
वास्तविक स्वतंत्रता राष्ट्र की नहीं, व्यक्ति की होती है || आचार्य प्रशांत, युवाओ के संग (2012)
चमत्कार सिर्फ़ तब है जब तुम से हो || आचार्य प्रशांत (2017)
गुरु के निकट आये बिना गुरुवचन को न समझ पाओगे || आचार्य प्रशांत (2017)
गुरु को गुरु, आपका शिष्यत्व बना देता है || आचार्य प्रशांत (2017)
मन को अखाड़ा न बनने दें || आचार्य प्रशांत, युवाओं के संग (2012)
जैसा अंतःकरण, वैसा व्याकरण || आचार्य प्रशांत, युवाओं के संग (2012)
तुम्हारा इंटरव्यू दस मिनट नहीं, तीन साल चलता है || आचार्य प्रशांत, युवाओं के संग (2012)
वो कैसे पाऊं जिससे सच्चा प्यार है? || आचार्य प्रशांत, युवाओं के संग (2012)
पहले नकली चेहरे उतारो, फिर कोहम इत्यादि पुकारो || आचार्य प्रशांत, युवाओं के संग (2012)
पूर्ण पलायन तो कोई सूरमा ही कर सकता है || आचार्य प्रशांत (2017)
विचार का विरोध, विचार को दीर्घायु बना देता है || आचार्य प्रशांत (2017)
रिश्ते में अगर आज़ादी नहीं तो रिश्ता झूठा है || आचार्य प्रशांत (2016)
जो तुम्हें चाहिए वो तुम्हें चाहने के ही कारण नहीं मिलता || आचार्य प्रशांत (2016)
कृष्ण का नृत्य न आयोजित है और न व्यवस्थित || आचार्य प्रशांत, श्रीकृष्ण पर (2016)