अनुभव आपको मैला तब करता है जब आप अनुभव से डरते हो || आचार्य प्रशांत (2016)
आचार्य प्रशांत
आप जिसे हृदय कहते हो, वो भी मन ही है || आचार्य प्रशांत (2016)
क्षणिक राहत को ख़ुशी का नाम मत दो || आचार्य प्रशांत, युवाओं के संग (2012)
आध्यात्मिक यात्रा की शुरुआत के बाद बाधाएँ || आचार्य प्रशांत (2017)
मुक्ति अकारण होती है || आचार्य प्रशांत (2017)
निजता,आत्मा, और सच्चाई, वैकल्पिक नहीं || आचार्य प्रशांत, युवाओं के संग (2012)
तुम जैसे हो, तुम्हारे रिश्ते भी वैसे ही होंगे || आचार्य प्रशांत (2017)
आत्म-छवि आती है दूसरों की मान्यताओं से || आचार्य प्रशांत, युवाओं के संग (2012)
निर्णय और विकल्प, दोनों मात्र भ्रम || आचार्य प्रशांत, युवाओं के संग (2012)
न मम न त्वम्, प्रेम है सर्वम || आचार्य प्रशांत, युवाओं के संग (2012)
खुद को जानने के लिये दूसरे की मदद क्यों लूँ? || आचार्य प्रशांत, युवाओं के संग (2012)
तुम मन होते तो विचार के साथ तुम भी चले जाते || आचार्य प्रशांत, युवाओं के संग (2012)
तुम्हारा प्रयास ही बाधा है समझने में || आचार्य प्रशांत, युवाओं के संग (2012)
लक्ष्य बनाना ही है लक्ष्य से चूक जाना || आचार्य प्रशांत, युवाओ के संग (2012)
माँ होना परमात्मा होने जैसी ज़िम्मेदारी है || आचार्य प्रशांत (2017)
बीमारी को बीमारी न मानना ही बीमारी है || आचार्य प्रशांत (2017)
सही और गलत की परिभाषा || आचार्य प्रशांत (2017)
आपको ठीक वैसी दुनिया मिल जाती है जैसे आप हैं || आचार्य प्रशांत (2016)
उड़ने के कोई कारण नहीं होते, लेकिन न उड़ने के हमेशा कारण होते हैं || आचार्य प्रशांत (2016)
मन तो उलझा है, दिल फिर भी सुलझा है || आचार्य प्रशांत (2016)
ग़ुलामी से ज़्यादा बड़ी ग़ुलामी आज़ादी है || आचार्य प्रशांत (2016)
तोता बोला, “मैंने चुना है पिंजरा” || आचार्य प्रशांत, युवाओ के संग (2012)
संसार के बीचोंबीच, संसार से मुक्त || आचार्य प्रशांत (2016)
सजगता का सस्ता विकल्प है डर || आचार्य प्रशांत, युवाओ के संग (2012)
जो डूबने से डरते हैं, गहराइयाँ उनके लिए नहीं है || आचार्य प्रशांत (2016)
वर्तमान में जीना' क्या है? || आचार्य प्रशांत (2016)
जो नफ़रत में बदल जाए वो प्रेम कभी था ही नहीं || आचार्य प्रशांत, युवाओ के संग (2012)
आपके बच्चे आपकी सुनते क्यों नहीं? || आचार्य प्रशांत (2017)
सच देखने में सोचा नहीं जाता, डूबा जाता है || आचार्य प्रशांत (2016)
करेक्टली नहीं, राइटली जियो (नैतिकता नहीं, धर्म) || आचार्य प्रशांत, युवाओं के संग (2012)