भ्रष्ट जीवन का लक्षण है भ्रष्ट भाषा || आचार्य प्रशांत, युवाओं के संग (2012)
आचार्य प्रशांत
जहाँ पूर्णता नहीं है वहीं परेशानी है || आचार्य प्रशांत (2016)
सिर्फ़ सत्य के सामने ही झुका जा सकता है || आचार्य प्रशांत (2016)
समझ और संकंल्प || आचार्य प्रशांत, युवाओं के संग (2012)
उत्कृष्टता का स्रोत है आनंद || आचार्य प्रशांत, युवाओं के संग (2012)
अपनी प्रभावशाली छवि कैसे स्थापित करें? || आचार्य प्रशांत, युवाओं के संग (2013)
सपने की नियति है टूटना || आचार्य प्रशांत, युवाओं के संग (2012)
सरलता माने क्या? || आचार्य प्रशांत, युवाओं के संग (2012)
साक्षात्कार(इंटरव्यू) में मुँह क्यों नहीं खुलता? || आचार्य प्रशांत, युवाओं के संग (2013)
मन प्रभावों से अनछुआ रहे || आचार्य प्रशांत, युवाओं के संग (2012)
प्रेम और भावनाएँ, उम्मीद और स्वेच्छा || आचार्य प्रशांत, युवाओं के संग (2012)
जानना, उत्कृष्टता, लक्ष्य और कल्पनाएँ || आचार्य प्रशांत, युवाओ के संग (2012)
निजता क्या है ? || आचार्य प्रशांत, युवाओं के संग (2012)
नयी दुनिया और पुराने तरीक़े || आचार्य प्रशांत, युवाओं के संग (2012)
आरक्षण का सामना क्यों करना पड़ता है? || आचार्य प्रशांत, युवाओं के संग (2012)
तन का हाव मन का भाव || आचार्य प्रशांत, युवाओं के संग (2012)
मूल्य देने से पहले, मूल्यों को जानो || आचार्य प्रशांत, युवाओं के संग (2012)
हर काम के साथ परिणाम की उम्मीद क्यों? || आचार्य प्रशांत, युवाओं के संग (2012)
आदमी की खोपड़ी कभी नहीं भरती || आचार्य प्रशांत, युवाओं के संग (2012)
भागवतपुराण पर प्रवचन माला || आचार्य प्रशांत (2016)
झूठ के दाग || आचार्य प्रशांत, युवाओ के संग (2012)
ईमानदारी है होली के बाद का साफ़ चेहरा || आचार्य प्रशांत, युवाओं के संग (2012)
सफलता से मुक्ति ही डर से मुक्ति है || आचार्य प्रशांत, युवाओं के संग (2012)
जितना सर को झुकाओगे उतने शांत होते जाओगे || आचार्य प्रशांत (2017)
चालाक आदमी को उसकी चालाकी ही भारी पड़ती है || आचार्य प्रशांत (2017)
क्या एक साथ रहने से प्यार बढ़ेगा? || आचार्य प्रशांत (2016)
क्या माँग रहे हो दुनिया से? || आचार्य प्रशांत (2016)
वृत्तियों के ज़ोर को कैसे कम करूँ? || आचार्य प्रशांत (2017)
क्या मुक्ति ज़रुरी है? || आचार्य प्रशांत (2017)
ईमानदारी के अलावा कोई विधि नहीं || आचार्य प्रशांत (2017)