जब मन 'सिक' हो जाता है तो उसे कहते हैं मानसिकता || आचार्य प्रशांत, युवओं के संग (2012)
आचार्य प्रशांत
माहौल से आती हैं आदतें || आचार्य प्रशांत (2017)
भविष्य के सपने || आचार्य प्रशांत, युवाओं के संग (2014)
जो डूबने से डरते हैं, गहराइयाँ उनके लिए नहीं है || आचार्य प्रशांत (2016)
अपने जिय से जानिए मेरे जिय की बात || आचार्य प्रशांत, संत कबीर पर (2015)
सजगता का सस्ता विकल्प है डर || आचार्य प्रशांत, युवाओ के संग (2012)
अँधेरा कितना भी बड़ा हो, नज़र तो रोशनी पर ही टिकेगी || आचार्य प्रशांत (2017)
तोता बोला, “मैंने चुना है पिंजरा” || आचार्य प्रशांत, युवाओ के संग (2012)
अध्यात्म का मज़ा ये कि बेवकूफ़ी मन में उठती ही नहीं || आचार्य प्रशांत (2017)
मन तो उलझा है, दिल फिर भी सुलझा है || आचार्य प्रशांत (2016)
झूठा स्वाभिमान || आचार्य प्रशांत, युवाओ के संग (2012)
सफलता से मुक्ति ही डर से मुक्ति है || आचार्य प्रशांत, युवाओं के संग (2012)
अज्ञेय के आगे झुकना सीखिए || आचार्य प्रशान्त (2016)
अपने करे संसार तो मिला नहीं, परमात्मा क्या मिलेगा || आचार्य प्रशांत (2014)
न मम न त्वम्, प्रेम है सर्वम || आचार्य प्रशांत, युवाओं के संग (2012)
क्षणिक राहत को ख़ुशी का नाम मत दो || आचार्य प्रशांत, युवाओं के संग (2012)
आत्मा नर्तक है, मन धावक है || आचार्य प्रशांत (2016)
ईमानदारी है होली के बाद का साफ़ चेहरा || आचार्य प्रशांत, युवाओं के संग (2012)
जीवन में इतनी उलझनें क्यों हैं? || आचार्य प्रशांत (2017)
खुद को जानने के लिये दूसरे की मदद क्यों लूँ? || आचार्य प्रशांत, युवाओं के संग (2012)
स्वयं को व्यक्त करने में हिचक क्यों? || आचार्य प्रशांत, युवाओं के संग (2013)
नकली समस्या का असली समाधान क्या? || आचार्य प्रशांत, युवाओं के संग (2013)
सरलता माने क्या? || आचार्य प्रशांत, युवाओं के संग (2012)
निजता क्या है ? || आचार्य प्रशांत, युवाओं के संग (2012)
नयी दुनिया और पुराने तरीक़े || आचार्य प्रशांत, युवाओं के संग (2012)
क्या सामाजिक रह करके भी मन अपना रह सकता है? || आचार्य प्रशांत (2016)
ख़ुशी, अहंकार, गुस्सा और प्रेम || आचार्य प्रशांत (2017)
प्रतिबद्धता माने क्या? || आचार्य प्रशांत (2017)
जीवन से हिंसा कैसे कम करें? || आचार्य प्रशांत (2015)
गुरु वो जो तुम्हें घर भेज दे || आचार्य प्रशांत (2014)