सफलता का प्रत्येक प्रयास आखिरी शांति देने में असफल रहेगा || आचार्य प्रशांत (2015)
आचार्य प्रशांत
जिन प्रभावों से मन गंदा होता है, क्यों उनके पास जाते हो? || आचार्य प्रशांत (2015)
जो तुम्हारे दिल में बसता है, उसी की बात मेरी ज़बान पर बसती है || आचार्य प्रशांत (2015)
दुनिया से मिला बस सपना था, सपने में खोया जो अपना था || आचार्य प्रशांत, संत कबीर पर (2015)
श्रद्धा न अंधविश्वास है, न आत्मविश्वास || आचार्य प्रशांत (2015)
Observing the world, one comes to the ego. Observing ego, one comes to the Self || Acharya Prashant
Acharya Prashant
विश्राम मनुष्य का सहज स्वभाव और अस्तित्व का केन्द्रीय मूल्य है || आचार्य प्रशांत (2015)
तुम्हारे लिए जगत न मिथ्या है, न मिथ्या कहो || आचार्य प्रशांत (2014)
इन्द्रियों के पीछे की इन्द्रिय है मन || आचार्य प्रशांत, गुरु नानक देव पर (2014)
Why does one need to be reminded of his own nature? || Acharya Prashant, with youth (2015)
जो छोटे मसले नहीं संभाल सकता, वो बड़े क्या संभालेगा || आचार्य प्रशांत (2014)
गुरु तुम्हारी बीमारी के कारणों का कारण जाने || आचार्य प्रशांत (2015)
जो मौत से नहीं भागता उसे ज़िन्दगी मिल गई || आचार्य प्रशांत (2014)
जान गये तो राम पाया, नहीं जाने तो बस माया || आचार्य प्रशांत, संत कबीर पर (2014)
गुरु से मन हुआ दूर, बुद्धि पर माया भरपूर || आचार्य प्रशांत, संत कबीर पर (2014)
तुम्हारी सहमति के बिना ठगे नहीं जा सकते तुम || आचार्य प्रशांत, संत कबीर पर (2015)
आध्यात्मिकता अलग है सामाजिक नैतिकता से || आचार्य प्रशांत, श्रीकृष्ण पर (2015)
Babaji can't even talk sense, how will he talk spirituality? || Acharya Prashant, with youth (2014)
दुःख तुमने कोशिश कर करके अर्जित किया है || आचार्य प्रशांत (2015)
Love, Compromise, Magic, God.... || Acharya Prashant, with youth (2014)
माया नहीं दीवार ही, माया सत्य का द्वार भी || आचार्य प्रशांत, संत कबीर पर (2014)
सोच सोच कर नहीं समझ पाओगे || आचार्य प्रशांत (2015)
कचरे से मोह छोड़ना है वैराग्य; निरंतर सफाई है अभ्यास || आचार्य प्रशांत, श्रीकृष्ण पर (2015)
मन ने जो पकड़ा सब अधूरा, मन कहाँ जान पाएगा पूरा || आचार्य प्रशांत (2015)
झुका जो सामने सदा निराकार के, सर पर ताज उसके सारे संसार के || आचार्य प्रशांत, संत कबीर पर (2014)
संसार चाहे भेंट तुम्हारे धन की; गुरु लेता भेंट अहंता मन की || आचार्य प्रशांत, संत कबीर पर (2014)
पुराण दिखाएँ मन का विस्तार, उपनिषद ले जाएँ मन के पार || आचार्य प्रशांत (2014)
माया की स्तुति में रत मन सत्य की निंदा करेगा ही || आचार्य प्रशांत, संत कबीर पर (2014)
न प्रयत्न न प्रार्थना, सहज मिले को क्या माँगना || आचार्य प्रशांत, संत कबीर पर (2014)
जीवन से अनजाना मन मौत से बचने को आतुर रहता है || आचार्य प्रशांत (2015)