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Leadership

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तृप्त मन ही आत्मा है || आचार्य प्रशांत (2019)
Leadership
तृप्त मन ही आत्मा है || आचार्य प्रशांत (2019)
5min
17reads

प्रश्नकर्ता: मन, आत्मा और मैं, जैसे कि मैं अतृप्त आत्मा हूँ, हम बोलते हैं या मैं बोलता हूँ तो उसमें से, मैं और अतृप्त चेतना हूँ तो…।

आचार्य प्रशांत: सब पता है क्यों मुस्कुरा रहे हैं? क्योंकि अभी मैं गया भी नहीं, और आपने कहानियाँ बना लीं।

प्र: सवाल मन…

क्रिकेट देखने का मज़ा ही तब है || नीम लड्डू
Suffering
क्रिकेट देखने का मज़ा ही तब है || नीम लड्डू
2min
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मैं वनडे(एक दिवसिय) देखता नहीं, टी-२० देखता नहीं, मैं सिर्फ़ टेस्ट मैच देखता हूँ; वह भी तब जब भारत जाता है – वो ही जो सेना कंट्रीज़ हैं चार, साउथ अफ्रीका, इंग्लैंड, न्यूज़ीलैंड, ऑस्ट्रेलिया – और उसमें भी तब देखता हूँ जब टीम की हालत बिलकुल ख़राब हो, क्योंकि…

कहीं जवानी व्यर्थ ही न निकल जाए || नीम लड्डू
Passion
कहीं जवानी व्यर्थ ही न निकल जाए || नीम लड्डू
1min
23reads

युवा होने का अर्थ होता है कि सुडौल शरीर हो, चौंड़ी छाती, मज़बूत कंधे और विराट ह्रदय। दुनिया की समझ, दुनिया की सारी क्रांतियाँ जवान लोगों ने करी हैं। और ‘क्रांति’ से मेरा मतलब पत्थरबाजी और हुल्लड़ नहीं है। क्रांति बहुत समझदार लोगों का काम होती है, क्रांति का मतलब…

ऐसे जाँचो अपनी ताक़त को || नीम लड्डू
Passion
ऐसे जाँचो अपनी ताक़त को || नीम लड्डू
2min
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आचार्य प्रशांत: सिर्फ़ इसलिए कि तुम्हें शरीर मिला है इंसान का तो तुम इंसान नहीं हो गए।

इंसान बस वो है जो चुनौतियों के सामने बिलकुल छाती खोल कर खड़ा हो जाए। कहे, “आओ!” जैसे सुबह हो गई हो, ऊर्जा आ गई हो शरीर में कि सामने चुनौती खड़ी हो…

Excerpts from Articles
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“माँसाहार गरीबों के लिए वरदान है क्योंकि माँसाहार के माध्यम से गरीबों को सस्ता प्रोटीन मिल जाता है।“ १ ग्राम प्रोटीन अगर आप मटन से लेते हैं तो लगते हैं ३ रुपये। उतना ही प्रोटीन, १ ग्राम, अगर आप अंडे से लेते हैं तो लगते हैं १ रुपय ३० पैसे, उतना ही प्रोटीन, १ ग्राम, अगर आप चिकन से लेते हैं तो लगता हैं १ रुपया।
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राधा-कृष्ण में भी तो प्रेम था, तो आप हमारे प्रेम को सम्मान क्यों नहीं देते?
कृष्ण का खुद ऊँचा होना, कृष्ण के पूरे जीवनवृत्त में, उनकी ज़िंदगी की जो पूरी कहानी है उसमें और श्री कृष्ण की प्रेमकथा में एक सूत्र है जो साझा पिरोया हुआ है। गीता की ऊँचाई, कृष्ण के जीवन की ऊँचाई, और कृष्ण के प्रेम की ऊँचाई तीनों एक हैं। ऐसा नहीं हो सकता कि कृष्ण बहुत ऊँचे हों और उनका प्रेम निचले तल का हो जाए। ये संभव नहीं है।
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शिव-शक्ति
नवरात्र का माहौल है। शक्ति के बारे में कुछ बातें करना प्रासंगिक रहेगा। शिव केंद्र हैं, शिव सत्य हैं। शिव वो हैं जिन तक मन, 'मन' रह कर नहीं पहुंच सकता। शिव को तो रहस्य रहना है सदा। शक्ति, मन है, संसार है। शिव में स्थिरता है, अचलता है।
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आंसू अगर सच्चे हैं तो भीतर आनंद ही आनंद है
अगर आँसू सच्चे हैं तो उनका संबंध उत्सव और आनंद से है, उनका संबंध जाते हुए दुःख से है। आँसुओं के अर्थ ये नहीं है कि तुम दुखी हो, आँसुओं का अर्थ भी हो सकता है कि तुम आनंदित हो। मुक्त अनुभव कर रहे हो, भीतर की जकड़ को छोड़ने के लिए।
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लोकमत न्यूज़ – "स्वतंत्रता दिवस: वास्तविक स्वतंत्रता क्या है
\"स्वतंत्रता कोई उपहार नहीं, बल्कि एक उपलब्धि है जिसे प्रत्येक व्यक्ति को स्वयं अर्जित करना पड़ता है। राजनीतिक स्वतंत्रता हमें विरासत में मिल सकती है, किंतु मानसिक और आध्यात्मिक स्वतंत्रता के लिए सतत प्रयास
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स्मोक टेस्ट हिन्दी लेख 16 अगस्त 2026
हिन्दी स्मोक टेस्ट लेख का संक्षिप्त विवरण।
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जीवन-मरण का ये चक्र चल क्यों रहा है? || आचार्य प्रशांत, वेदांत पर (2021)
जन्म-मरण का चक्र क्यों है? इसका अर्थ यही नहीं है कि शिष्य बस इतना ही पूछना चाहता है कि कोई जन्मता क्यों है, कोई मरता क्यों है, चक्र क्यों चल रहा है। वो वास्तव में सबकुछ पूछ रहा है, सबकुछ। अब ये पढ़ने वाले की बुद्धि पर है कि वो इस बात को समझ जाए कि इतना ही नहीं पूछा गया है कि जन्म-मरण का चक्र क्यों है।
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Description enwcoiew fkwsc J. Krishnamurti.
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Why do I restless
This article is related to restlessness.
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Who controls your mood?
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रक्षा बंधन पर आचार्य प्रशांत का संदेश
\"रक्षाबंधन एक स्मरण हो सकता है कि हम सब मिलकर उस विवेक, उस करुणा की रक्षा करें जो जीवन को जीवन बनाती है। यह पर्व केवल उपहारों का आदान-प्रदान न रह जाए, बल्कि यह एक ऐसा संकल्प बन जाए जिसमें हम एक-दूसरे के आत्मबल और ऊंची चेतना के
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What does love mean?
You must know what is love. How it shapes your life.
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गुरु के प्रति धन्यवाद कम क्यों हो जाता है? आचार्य प्रशांत (2017)
अब देखिएगा, क्या हो रहा है। कोई कृतज्ञ कब अनुभव करेगा? जब पहले उसकी हालत ख़राब हो और कोई बचाए। आपके भीतर अभी यह इच्छा शेष है कि आप कृतज्ञ अनुभव करती रहें और कृतज्ञता अनुभव करने के लिए ज़रूरी है कि कुछ गड़बड़ हो और फिर उस गड़बड़ से आप उबार ली जाएँ। तो फिर आप कृतज्ञ अनुभव करेंगी कि, अरे, मेरा सौभाग्य कि मुझे किसी ने बचा लिया।
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Why do I restless
Hindi article on restlessness by AP
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Who controls your mood?
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कर्म और अतीत से मुक्ति कैसे मिले ?
इन सब से मुक्ति का एक ही तरीका है, वो बचो ही नहीं जो मूर्ख जाकर के दुनिया से, जगत से, प्रकृति से कामना पूर्ति की आशा रखता था, वो बचो ही नहीं। उसके अलावा और तुम कितने भी हथकंडे लगा लो, अतीत तो लौट-लौट के बार-बार आएगा और सर पर चढ़ेगा ही चढ़ेगा।
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इसलिए नहीं मिलती सरकारी नौकरी || नीम लड्डू
Success
इसलिए नहीं मिलती सरकारी नौकरी || नीम लड्डू
1min
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आचार्य प्रशांत: हिंदुस्तान में जानते हो न दस-लाख लोग आवेदन भरते हैं और चयन होता है दो-सौ का। ऐसे ही चलता है न? कितना प्रतिशत हुआ ये? प्रश्नकर्ता: एक-प्रतिशत भी नहीं हुआ। आचार्य: कितना हुआ? तुम्हें अध्यात्म की नहीं, मैथ्स (गणित) की ज़रूरत है। ऐसे नहीं किसी भी काम में…

छोटी बातों में उलझे रहोगे तो बड़ा काम कब करोगे? || आचार्य प्रशांत (2019)
Maturity
छोटी बातों में उलझे रहोगे तो बड़ा काम कब करोगे? || आचार्य प्रशांत (2019)
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प्रश्नकर्ता: आचार्य जी, आपके वीडियो में एक बात सुनी थी, वो बात मन में ठहर गई। अब जो भी हरकत करता हूँ, जो भी गलती करता हूँ, तो उस वीडियो में सुनी उस बात को याद कर लेता हूँ, और उसी के संदर्भ में सीखने का प्रयास करता हूँ।

आपने…

महापुरुषों जैसा होना है? || (2019)
Guru
महापुरुषों जैसा होना है? || (2019)
6min
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प्रश्नकर्ता: ऊँचा जीवन कैसे जीएँ? आदर्शों को अपने जीवन में कैसे अपनाएँ?

आचार्य प्रशांत: जिसको भी तुम मानते हो अपने से ऊँचा, जिसको भी सम्माननीय मानते हो, उसकी छवि लगातार आँखों में बसी रहे। और आँखें ऐसी हैं नहीं कि जब तक वो भौतिक रूप से न देखें तब तक…

हम ऐसे बदलेंगे नौकरशाही, राजनीति और देश को || आचार्य प्रशांत (2019)
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हम ऐसे बदलेंगे नौकरशाही, राजनीति और देश को || आचार्य प्रशांत (2019)
15min
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प्रश्नकर्ता: आचार्य जी, मेरा सवाल ब्यूरोक्रेसी (नौकरशाही) से है। हमारे ऊपर जो अधिकारी हैं, क्या उन्हें जागरूक नहीं होना चाहिए? हम लोग भी सोचते हैं कि अगर हमारा बॉस थोड़ा जागरूक होता, तो वो और अच्छे निर्णय ले सकते था।

आचार्य प्रशांत: ऐसा आप सोचती हैं अपने बॉस के बारे…

क्या बड़ों का सुझाव हमेशा सही होता है? || आचार्य प्रशांत, युवाओ के संग (2014)
Individuality
क्या बड़ों का सुझाव हमेशा सही होता है? || आचार्य प्रशांत, युवाओ के संग (2014)
6min
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प्रश्न: आचार्य जी, हमारे अभिभावक, हमारे बड़े, जो भी सुझाव देते हैं क्या वो हमेशा सही होते हैं?

आचार्य प्रशांत जी: मैं बड़ा हूँ तुमसे, हूँ न? मैं जो जवाब दूँगा, तुम्हें कैसे पता वो सही होगा?

यही प्रयोग कर लेते हैं। मैं भी तो बड़ा हूँ, जैसे दूसरे बड़े…

बोधशिविर से फ़ायदा क्या है? || युवाओं के संग (2016)
Values
बोधशिविर से फ़ायदा क्या है? || युवाओं के संग (2016)
10min
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प्रश्नकर्ता: आचार्य जी, बोध-शिविर से फ़ायदा क्या है?

आचार्य प्रशांत: आदमी, शरीर के ऊपर चढ़ी हुई समाज की परत है। जिसको अपना जन्म कहते हो, वो शरीर के साथ होता है। और फिर समाज उस पर एक परत और चढ़ा देता है। ये दोनों ही परतें तुम्हारा दुःख हैं। ये…

कई बुद्ध पुरुषों ने समाज क्यों छोड़ा? || (2017)
Leadership
कई बुद्ध पुरुषों ने समाज क्यों छोड़ा? || (2017)
6min
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प्रश्नकर्ता: आचार्य जी, बुद्ध पुरुषों ने जो बताया है समाज को, वह बहुत सरल है, लेकिन फिर भी इतना झूठ, इतना ड्रामा क्यों?

आचार्य प्रशांत: आप बताओ क्यों? कहीं बाहर से थोड़े ही टपक रहा है, रोज़ हम ही करते हैं। आप बताओ क्यों?

आप जिस वजह से करते हो,…

दुनिया में इतने कम कबीर क्यों? || आचार्य प्रशांत (2017)
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दुनिया में इतने कम कबीर क्यों? || आचार्य प्रशांत (2017)
7min
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प्रश्नकर्ता: आचार्य जी, दुनिया में इतने कम कबीर क्यों हुए हैं? मेरे परिवारजन मुझे इसी बात का उदाहरण देकर आध्यात्मिक मार्ग से विचलित करते हैं और खुद को भी दुनिया की ओर आकर्षित पाता हूँ, कृपया स्पष्ट करें।

आचार्य प्रशांत: करोड़ों कबीर हो जाते, पर हर कबीर के पास वैसा…

आइ.आइ.टी, आइ.आइ.एम के बाद अध्यात्म क्यों? || आचार्य प्रशांत (2013)
Individuality
आइ.आइ.टी, आइ.आइ.एम के बाद अध्यात्म क्यों? || आचार्य प्रशांत (2013)
18min
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प्रश्न: आपकी प्रोफाइल देखी है, आपने आई. आई. टी. दिल्ली से इंजीनियरिंग की है और उसके बाद आई. आई. एम्. अहमदाबाद । तो उसके हिसाब से आप अब्रॉड में इस समय बहुत मजे से ऐश कर सकते थे ।

(अट्टहास)

आपको किसी ने क्या प्रेरित किया, जो आज आप…

आपके बच्चे आपकी सुनते क्यों नहीं? || आचार्य प्रशांत (2017)
Parenting
आपके बच्चे आपकी सुनते क्यों नहीं? || आचार्य प्रशांत (2017)
21min
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प्रश्नकर्ता: पेरेंटिंग (परवरिश) को निपुणता से कैसे किया जाए? कभी-कभी हम चाहते भी हैं करना, पर हम कर नहीं पाते, क्योंकि बाहर की स्थितियाँ ऐसी होती हैं।

आचार्य प्रशांत: जो आपने बाहरी स्थितियों के बारे में कहा, वो बिलकुल ठीक है। लेकिन निष्कर्ष दूसरा भी हो सकता है। आप यूँ…

बोध क्या है? || आचार्य प्रशांत, युवाओं के संग (2013)
Goal
बोध क्या है? || आचार्य प्रशांत, युवाओं के संग (2013)
4min
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प्रश्न: प्रश्न है, ‘जिसको हम बौद्धिक स्तर(इंटेलिजेंस कोशिएंट, आई.क्यू.) बोलते हैं वो अलग-अलग व्यक्तियों में अलग-अलग होता है, इस बात का क्या अर्थ है?’

वक्ता: शायद ये सवाल यहाँ से आ रहा है कि मैंने ‘इंटेलिजेंस’ शब्द का प्रयोग किया था| मैंने कहा था कि मूलतः तुम ‘इंटेलीजेंट’ हो, तो…

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Who controls your mood?
Knowledge Capsule
Who controls your mood?
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Why do I restless
Shri Krishna
Why do I restless
1min
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Hindi article on restlessness by AP

Title
Shri Krishna
Title
1min
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Questioner(Q): What is the process of clarity? Is it just listening with immersion and no resistance? What is Truth? How we decide it?

Acharya Prashant (AP): Listening without effort, plus if there is Truth in what you hear, there is change and transformation, and that Truth becomes the master. We…

Why do I restless
श्रीमद्भगवद्गीता
Why do I restless
9min
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This article is related to restlessness.

राधा-कृष्ण में भी तो प्रेम था, तो आप हमारे प्रेम को सम्मान क्यों नहीं देते?
Love
राधा-कृष्ण में भी तो प्रेम था, तो आप हमारे प्रेम को सम्मान क्यों नहीं देते?
10min
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कृष्ण का खुद ऊँचा होना, कृष्ण के पूरे जीवनवृत्त में, उनकी ज़िंदगी की जो पूरी कहानी है उसमें और श्री कृष्ण की प्रेमकथा में एक सूत्र है जो साझा पिरोया हुआ है। गीता की ऊँचाई, कृष्ण के जीवन की ऊँचाई, और कृष्ण के प्रेम की ऊँचाई तीनों एक हैं। ऐसा नहीं हो सकता कि कृष्ण बहुत ऊँचे हों और उनका प्रेम निचले तल का हो जाए। ये संभव नहीं है।

न पकड़ना, न छोड़ना
Liberation
न पकड़ना, न छोड़ना
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यदा नाहं तदा मोक्षो

यदाहं बन्धनं तदा।

मत्वेति हेलया किंचिन्-

मा गृहाण विमुंच मा॥८- ४॥

अनुवाद: जब तक 'मैं' या 'मेरा' का भाव है तब तक बंधन है, जब 'मैं' या 'मेरा' का भाव नहीं है तब मुक्ति है। यह जानकर न कुछ त्याग करो और न कुछ ग्रहण ही…

शरीर के लिए योग, मन के लिए वेदांत || आचार्य प्रशांत, श्रीमद्भगवद्गीता पर (2022)
श्रीमद्भगवद्गीता
शरीर के लिए योग, मन के लिए वेदांत || आचार्य प्रशांत, श्रीमद्भगवद्गीता पर (2022)
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प्रश्नकर्ता: प्रणाम आचार्य जी, अर्जुन कहते हैं कृष्ण से कि ‘धृतराष्ट्र पुत्र चाहे मुझे मार भी दें तो भी उनसे लड़ना तो ग़लत ही है।‘ हमारे आम जीवन में भी ऐसे ही चलता रहता है कि हम इमोशनल ब्लैकमेल (भावनाओं से किसी को नियंत्रित करना) करते हैं बहुत बार, या…

समय और संसार क्यों? मर्यादा अनिवार्य क्यों? || आचार्य प्रशांत, श्रीमद्भगवद्गीता पर (2022)
श्रीमद्भगवद्गीता
समय और संसार क्यों? मर्यादा अनिवार्य क्यों? || आचार्य प्रशांत, श्रीमद्भगवद्गीता पर (2022)
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प्रश्नकर्ता: कुछ दिन पहले आपने एक उदाहरण दिया था, एम एच ३७० का, कि हम जो खोज रहे हैं वो हमें कहीं मिल नहीं रहा इसलिए यूनिवर्स (ब्रह्माण्ड) इतना बड़ा है कि लगातार हम खोजते जा रहे हैं। तो स्पेस (स्थान) की तो बात उससे समझ में आ रही है।…

प्रारब्ध, कर्मफल और आत्मविचार || आचार्य प्रशांत, श्रीमद्भगवद्गीता पर (2022)
श्रीमद्भगवद्गीता
प्रारब्ध, कर्मफल और आत्मविचार || आचार्य प्रशांत, श्रीमद्भगवद्गीता पर (2022)
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प्रश्नकर्ता: अभी आप कह रहे थे कि श्रीकृष्ण अपनी बारी का इंतज़ार कर रहे हैं और बाकी सब लोग अपने बारे में बोले जा रहे हैं। तो क्या इसका सम्बन्ध इससे है कि श्रीकृष्ण का कर्मफल और प्रारब्ध कट चुका है लेकिन बाकी सभी का कर्मफल और प्रारब्ध अभी जारी…

एक अध्याय अर्जुन का, सत्रह अध्याय कृष्ण के || आचार्य प्रशांत, श्रीमद्भगवद्गीता पर (2022)
श्रीमद्भगवद्गीता
एक अध्याय अर्जुन का, सत्रह अध्याय कृष्ण के || आचार्य प्रशांत, श्रीमद्भगवद्गीता पर (2022)
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कुलक्षये प्रणश्यन्ति कुलधर्माः सनातनाः।

धर्मे नष्टे कुलं कृत्स्नमधर्मोऽभिभवत्युत ॥४०॥

"कुल के नाश से, चले आ रहे कुल के धर्म नष्ट हो जाते हैं और कुलधर्म के नष्ट होने से पाप समस्त कुल को दबा लेता है।"

~ श्रीमद्भगवद्गीता, अध्याय १, अर्जुन विषाद योग, श्लोक ४०

आचार्य प्रशांत तो अर्जुन के…

हमारे जीवन के युद्ध और कृष्ण की समीपता || आचार्य प्रशांत, श्रीमद्भगवद्गीता पर (2022)
श्रीमद्भगवद्गीता
हमारे जीवन के युद्ध और कृष्ण की समीपता || आचार्य प्रशांत, श्रीमद्भगवद्गीता पर (2022)
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आचार्य प्रशांत: श्रीकृष्ण की निकटता सीखनी है अर्जुन से; अर्जुन के भीतर का कोहरा उधार नहीं ले लेना है। और हमारी हालत ज़बरदस्त है, हमारे पास वो सब कुछ है जो अर्जुन के पास है, बस एक चीज़ नहीं है। हम हर मायने में अर्जुन हैं, अर्जुन का पूरा नर्क…

हम सब के भीतर एक अर्जुन है || आचार्य प्रशांत, श्रीमद्भगवद्गीता पर (2022)
श्रीमद्भगवद्गीता
हम सब के भीतर एक अर्जुन है || आचार्य प्रशांत, श्रीमद्भगवद्गीता पर (2022)
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आचार्य प्रशांत: देखिए, बात को समझिए। गीता, सांख्ययोग में, शुरू के कुछ श्लोकों के बाद से भी आरम्भ हो सकती थी। पहला अध्याय तो पूरा ही अर्जुन के विषाद का निरूपण है और दूसरे अध्याय के भी कुछ आरंभिक श्लोकों में अर्जुन की ही व्यथा है। कृष्ण की ज्ञानवर्षा तदोपरांत…

कर्म और कर्म में भेद || आचार्य प्रशांत, श्रीमद्भगवद्गीता पर (2022)
श्रीमद्भगवद्गीता
कर्म और कर्म में भेद || आचार्य प्रशांत, श्रीमद्भगवद्गीता पर (2022)
8min
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आचार्य प्रशांत: श्रीमद्भगवद्गीता, प्रथम अध्याय, अर्जुन विषाद योग। देखेंगे कि श्रीकृष्ण अर्जुन के सब भावुक, मार्मिक वक्तव्यों को किस प्रकाश में देख रहे हैं। तो अपनी ही मोहजनित पीड़ा को आगे अभिव्यक्त करते हुए अर्जुन कहते हैं:

यद्यप्येते न पश्यन्ति लोभोपहतचेतस: |

कुलक्षयकृतं दोषं मित्रद्रोहे च पातकम् ॥३८॥

यद्यपि ये…

हमारे जीवन में कब उतरती है गीता? || आचार्य प्रशांत, श्रीमद्भगवद्गीता पर (2022)
श्रीमद्भगवद्गीता
हमारे जीवन में कब उतरती है गीता? || आचार्य प्रशांत, श्रीमद्भगवद्गीता पर (2022)
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प्रश्नकर्ता: आपकी जो बाकी शिक्षाएँ हैं वो भी मुझे बिलकुल गीता से मिलती हुई लग रही हैं। आप जैसे पहले कहते थे कि हृदय में शिव और भुजाओं में शक्ति। तो अभी आप बोले कि हृदय कोमल होना चाहिए और बलिष्ठ भुजाएँ होनी चाहिए तो बिलकुल वो बातें एक जैसी…

कौन है गीता का अधिकारी?  || आचार्य प्रशांत, श्रीमद्भगवद्गीता पर (2022)
श्रीमद्भगवद्गीता
कौन है गीता का अधिकारी? || आचार्य प्रशांत, श्रीमद्भगवद्गीता पर (2022)
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तान्समीक्ष्य स कौन्तेयः सर्वान्बन्धूनवस्थितान्। कृपया परयाविष्टो विषीदन्निदमब्रवीत् ॥27॥

अर्जुन उवाच।

दृष्ट्वेमं स्वजनं कृष्ण युयुत्सुं समुपस्थितम्।

सीदन्ति मम गात्राणि मुखं च परिशुष्यति ॥28॥

वेपथुश्च शरीरे मे रोमहर्षश्च जायते ॥29॥

गाण्डीवं स्रंसते हस्तात्त्वक्चै व परिदह्यते।

न च शक्नोम्यवस्थातुं भ्रमतीव च मे मनः ॥30॥

“जब कुन्तिपुत्र अर्जुन ने अपने बंधु बान्धवों को वहाँ…

कब घटित होती है गीता?  || आचार्य प्रशांत, श्रीमद्भगवद्गीता पर (2022)
श्रीमद्भगवद्गीता
कब घटित होती है गीता? || आचार्य प्रशांत, श्रीमद्भगवद्गीता पर (2022)
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यावदेतानिरीक्षेऽहं योद्धकामानवस्थितान्।

कैर्मया सह योद्धव्यमस्मिन् रणसमुद्यमे ॥22॥

“मैं इन सब युद्ध करने की कामनाओं से अवस्थित योद्धाओं को देखूँ कि किन वीरों के साथ मुझे युद्ध करना होगा।”

~ श्रीमद्भगवद्गीता, श्लोक २२, अध्याय १, अर्जुन विषाद योग

आचार्य प्रशांत: क्या जानते नहीं हैं अर्जुन कि किनके साथ युद्ध करना होगा?…

अर्जुन की पात्रता || आचार्य प्रशांत, श्रीमद्भगवद्गीता पर (2022)
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अर्जुन की पात्रता || आचार्य प्रशांत, श्रीमद्भगवद्गीता पर (2022)
21min
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सेनयोरुभयोर्मध्ये रथं स्थापय मेऽच्युत ॥21॥

“हे अच्युत! दोनों सेनाओं के मध्य मेरा रथ स्थापित करें।”

~ श्रीमद्भगवद्गीता, श्लोक २१, अध्याय १, अर्जुन विषाद योग

आचार्य प्रशांत: अर्जुन का ये अनुरोध मेरे मन के बड़ा निकट रहा है सदा से। दो बातें हैं यहाँ पर अर्जुन के विषय में, दोनों ही…

गीता में कृष्ण के अनेकों नाम || आचार्य प्रशांत, श्रीमद्भगवद्गीता पर (2022)
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गीता में कृष्ण के अनेकों नाम || आचार्य प्रशांत, श्रीमद्भगवद्गीता पर (2022)
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आचार्य प्रशांत: हम सबके भीतर, हम कितना भी छुपा लें, पर होता है कोई जो सत्य को छोड़ नहीं सकता। हम स्वयं को कितना भी भ्रम में रख लें, एक तल पर सच्चाई हम सबको पता होती है। वास्तव में अगर सच्चाई पता ना हो तो स्वयं को भ्रम में…

कृष्ण ही अंतिम उपाय || आचार्य प्रशांत, श्रीमद्भगवद्गीता पर (2022)
श्रीमद्भगवद्गीता
कृष्ण ही अंतिम उपाय || आचार्य प्रशांत, श्रीमद्भगवद्गीता पर (2022)
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आचार्य प्रशांत: इन सैकड़ों श्लोकों की यात्रा करेंगे हम। इस यात्रा में ये सोच कर आगे नहीं बढ़िएगा कि आप पहले से कुछ भी जानते हैं। हर जगह रुकिए और पूछिए — ये क्या हो रहा है? उसको आदत-सा बना लीजिए, अभ्यास करिए।

जो अभ्यास आपका बाहर की तरफ़ रहता…

अपने ही विरुद्ध रण है गीता || आचार्य प्रशांत, श्रीमद्भगवद्गीता पर (2022)
श्रीमद्भगवद्गीता
अपने ही विरुद्ध रण है गीता || आचार्य प्रशांत, श्रीमद्भगवद्गीता पर (2022)
9min
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आचार्य प्रशांत: पहले ही अध्याय में, अच्छे से देखिए, दो हैं जो परेशान हैं। कौन? रणक्षेत्र में दो हैं जिनकी चिंता पहले ही अध्याय में हमारे सामने आ जाती है — दुर्योधन और अर्जुन।

इस बात को अच्छे से पकड़िए। चिन्ताग्रस्त होना बुरा नहीं है; दुर्योधन वाली चिंता रखना बुरा…

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कृष्ण को चुनना ही जीत है || आचार्य प्रशांत, श्रीमद्भगवद्गीता पर (2022)
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कृष्ण को चुनना ही जीत है || आचार्य प्रशांत, श्रीमद्भगवद्गीता पर (2022)
19min
42reads

सञ्जय उवाच।

दृष्ट्वा तु पाण्डवानीकं व्यूढं दुर्योधनस्तदा। आचार्यमुपसङ्गम्य राजा वचनमब्रतीत् ॥२॥

पश्यैतां पाण्डुपुत्राणामाचार्य महतीं चमूम्। व्यूढां द्रुपदपुत्रेण तव शिष्येण धीमता ॥३॥

अत्र शूरा महेष्वासा भीमार्जुनसमा युधि । युयुधानो विराटश्च द्रुपदश्च महारथः॥४॥

धृष्टकेतुश्चेकितानः काशिराजश्च वीर्यवान् । पुरुजित्कुन्तिभोजश्च शैब्यश्च नरपुङ्गवः॥५॥

युधामन्युश्च विक्रान्त उत्तमौजाश्च वीर्यवान् । सौभद्रो द्रौपदेयाश्च सर्व एव महारथाः॥६॥

अस्माकं तु…

हौसला ऐसा जो टूटे नहीं || नीम लड्डू
Success
हौसला ऐसा जो टूटे नहीं || नीम लड्डू
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1

संघर्ष में हम सभी हैं; ज़िंदगी युद्ध तो है ही। दूसरे को क्या दिखाना चाहते हो? अपनी चोट, अपनी हार या अपना हौसला? अपना हौसला दिखाओ न दूसरे को!

बचना ऐसे लोगों से जो बार-बार तुम्हें अपनी चोट और अपने घाव दिखाते हों। उसके पास जाना जिसके पास चोट भी…

हुआ छोकरा जवान रे || नीम लड्डू
Love
हुआ छोकरा जवान रे || नीम लड्डू
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लड़का-लड़की पंद्रह साल के हुए नहीं कि माँ-बाप बन सकते हैं, फिर? बहुत अक्ल आ जाएगी उनमें? और फिर जो बच्चा पैदा हो उसको सिखाएँ कि, “यह देवी-देवता हैं, हमने पैदा किया है।“ वह देवी-देवता ने नहीं पैदा किया है, वह पैदा इसलिए हो गया था क्योंकि देवी जी बहकी…

स्टुपिड प्यार  || नीम लड्डू
Love
स्टुपिड प्यार || नीम लड्डू
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“ओ ले-ले-ले! मेला शोमू कितना स्टुपिड है!" अरे! स्टुपिड (मूर्ख) है तो यह बोलने के लिए भी काहे को रुकी कि शोमू स्टुपिड है? भाग! जान बचाकर भाग। पर शोमू क्यूट ही इसीलिए है क्योंकि वह स्टुपिड है। अजीब बात है! तुमको पता है वह स्टुपिड है पर तुम तब…

सही ज़िन्दगी का ये बड़ा लक्षण || नीम लड्डू
Clarity
सही ज़िन्दगी का ये बड़ा लक्षण || नीम लड्डू
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देखिए यही एकमात्र तरीका है ये अपनी छोटी-सी ज़िंदगी सही तरीके से जीने का – जो सही है वो करना। हथियार डाल दो, मजबूर हो जाओ, बिलकुल समर्पण कर दो कि जो सही काम है वो तो करना ही है, अंजाम क्या होगा ना हम जानते हैं, ना हमें परवाह…

सफलता चाहिए तो अय्याशियाँ छोड़ो || नीम लड्डू
Mind
सफलता चाहिए तो अय्याशियाँ छोड़ो || नीम लड्डू
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यह सब अय्याशियाँ होती हैं, “मन कर रहा है, मन नहीं कर रहा है, आज दिल तन्हा सा है, उदास सा है।“ यह क्या है? मन गया भाड़ में! इधर काम रखा हुआ है, जो ज़रूरी चीज़ है वह करेंगे न, मन का क्या है!

मनचलों के लिए दुनिया की…

सफलता की असली कुंजी || नीम लड्डू
Adhyatma Upanishad
सफलता की असली कुंजी || नीम लड्डू
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मुक्तिका उपनिषद् है, उसमें राम ही कह रहे हैं, ‘एक उपनिषद् को कोई पढ़ ले वो तर जाएगा।‘ अच्छा एक में काम नहीं होता तो चलो जो १० या ११ प्रमुख उपनिषद् हैं उनको पढ़ लो! अच्छा उनसे भी काम नहीं होता तो लो मैं सूची दिए देता हूँ १०८…

सच्चा प्रेमी तुमसे बर्दाश्त नहीं होगा || नीम लड्डू
Love
सच्चा प्रेमी तुमसे बर्दाश्त नहीं होगा || नीम लड्डू
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लोग कहते हैं सच्चा प्यार मिलता नहीं, मैं कहता हूँ सच्चा प्यार तुमसे बर्दाश्त होता नहीं। मिल तो आज जाए, झेल लोगे? बड़े अफ़साने लिखे जाते हैं, शायरों की दूकान ही चल रही हैं इसी बात पर कि ‘हम तो बड़े क़ाबिल थे पर कमबख़्त ज़िंदगी ने धोखा दे दिया,…

शेर की तरह जियो || नीम लड्डू
Fear
शेर की तरह जियो || नीम लड्डू
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सबसे पहले यह समझो कि दूसरे तुम में कमज़ोरी देख रहे हैं न, इसीलिए तुम पर चढ़ने की कोशिश कर रहे हैं। अगर वह तुममे कमज़ोरी देखेंगे ही नहीं तो तुम पर चढ़ने की कोशिश भी नहीं करेंगे। बात यह नहीं है कि उसने जो भी कहा है वह सही…

शादी कब और किससे करें?  || नीम लड्डू
Love
शादी कब और किससे करें? || नीम लड्डू
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यह एक बड़ा भ्रम कि जल्दी से शादी कर लो और शादी करने से दूसरा व्यक्ति ज़िम्मेदार हो जाएगा। जो माँ-बाप कहते हैं, “ये बड़ा उद्दण्ड है, लड्डू। गाँव भर में लुढ़कते फिरता है लड्डू। तो लड्डू को ज़िम्मेदार बनाने के लिए लड्डू की शादी कर देते हैं।” घर में…

लोगों को आप से प्यार नहीं || नीम लड्डू
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लोगों को आप से प्यार नहीं || नीम लड्डू
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यह जगत तो लाभ का सौदागर है। वो आप से नहीं प्रेम करता; आपसे जो मिल रहा है उसे से प्रेम करता है। और इस बात का बड़ा कड़वा अनुभव आपको तब होता है जब आप देना बंद कर देते हैं। आप तो यही सोचते रह गए कि उस व्यक्ति…

ये ब्रेकअप होता क्या है? || नीम लड्डू
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ये ब्रेकअप होता क्या है? || नीम लड्डू
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ये ब्रेकअप होता क्या है? तुम्हें अगर प्रेम है तो क्या तुम तय करके किसी से दूर हो सकते हो? कर कैसे लोगे? ये बात तो हृदय की होती है, आत्मा की होती है। तुम तय थोड़े ही करोगे कि कल से इससे बात नहीं करनी है क्योंकि हमारा ब्रेकअप…

यू.पी.एस.सी की परीक्षा में असफल हो गए?  || नीम लड्डू
Passion
यू.पी.एस.सी की परीक्षा में असफल हो गए? || नीम लड्डू
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जिस साल मेरा चयन हुआ था, पाँच लाख बैठे थे और सीट थी मुश्किल से, मेरे ख्याल से, ढाई-सौ, तीन-सौ। वो जो पूरी प्रक्रिया है वो बनी ही ऐसी है कि उसमें से हज़ार में से नौ-सौ-निन्यानवे लोग अचयनित ही निकलेंगे और यह बात तुमको पहले से पता होती है…

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